“बंदर मामा” (बाल कविता)……… काजल सोनी

बंदर मामा बंदर मामा
बड़ी शरारत करते हो।
पेड़ पेड़ पर उछल उछल कर
टाइम पास करते हो ।
कभी बताशे खीर चुरमा
चुरा कर तुम खा जाते हो ।
बंदर मामा बंदर मामा
बड़ी शरारत करते हो।
पेड़ पेड़ पर उछल उछल कर
टाइम पास करते हो ।

आते जाते लोगों को
खूब तुम सताते हो ।
कान खुजाते सिर खुजाते
खी खी तुम दिखलाते हो।
बंदर मामा बंदर मामा
बड़ी शरारत करते हो।

सब तुमको मामा कहते
मामु तुम बनाते हो ।
रहते हो जब गुस्से में
जमकर आंख दिखाते हो।
बंदर मामा बंदर मामा
बड़ी शरारत करते हो।
पेड़ पेड़ पर उछल उछल कर
टाइम पास करते हो । ।

“काजल सोनी ”

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 30/08/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 30/08/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 30/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016

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