“पैगाम”

Sheetpaigaam
छुपा गया खंजर कोई, मेरे आशियाने में,
क़त्ल किये है लाखो, जिसने इस जमाने में,
रोटी रोटी को मोहताज कोई, कही ताज ही ताज है,
अपनी इस राजनीति पे, फिर भी हमको नाज है,
जागेगी जनता कभी तो मेरे फ़साने पे,
शायद जी उठेगा ये देश इसी बहाने से,
क़त्ल किये लाखो, जिसने इस जमाने में,
छुपा गया है खंजर कोई, मेरे आशियाने में
शीतलेश थुल !!

11 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 30/08/2016
  5. Kajalsoni 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 30/08/2016
  6. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016

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