चिड़िया सी ही होती हैं लड़कियां

चिड़िया सी ही होती हैं लड़कियां,
तभी तो चहकती हैं I
उसी मीठी चहक से तो मायके की,
सब वीथीयां महकती हैं II

दे देती हैं अपने पर,
मायके की कल्पनाओं को I
और कर देती हैं शेष समर्पित,
ससुराल की संभावनाओं को II

दारुण हृदय से मायका निभाता,
परिपाटी कन्यादान की I
ससुराल भी फिर सौंप देता है उसे,
धरोहर कुल के सम्मान की II

सृष्टि में ये दायित्व दो ही हैं सम्हालते,
या तुम लड़कियां या यह वसुंधरा I
जोड़ने, सहेजने, संवर्धन को ही तो,
ईश्वर ने तुम सी शक्ति का सृजन करा II

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  2. mani mani 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  3. shrija kumari shrija kumari 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  5. C.M. Sharma babucm 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  6. mani mani 29/08/2016
    • Vivek Singh विवेक सिंह 29/08/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  8. Kajalsoni 29/08/2016

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