तोल मोल के बोल – अनु महेश्वरी

आज़ादी के साथ कुछ ज़िम्मेदारियां भी आती है,
बस ये भूल बैठे हम|
जिसे देखो बोलने की आज़ादी चाहिए,
बिना सोचे बोलने की होड़ लगी,
तोल मोल के बोलना भूले हम|

जैसे कमान से निकला तीर वापस नहीं आता,
वैसे ही मुँह से निकला शब्द वापस नहीं आता|

मानव धर्म सबसे बड़ा,
ये मानले हम|
धर्म से पहले देश आता,
ये जानले हम|
समझदारी से बोलने की,
आदत डालले हम|

‘अनु महेश्वरी’
चेन्नई

8 Comments

  1. mani mani 01/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 01/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/09/2016

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