बाल मजदूरी – अनु महेश्वरी

बाल मजदूरी पाप है,
मानवता पे श्राप है।
बंद कब होगी पता नही ,
पता नही , पता नही।

गरीबी ने मजबूर कीया,
किताबें छोड़ झाड़ू पकड़ने को।
खेल की मैदान की जगह,
कारखानों में जाने को।
स्कूल जाने के बदले,
ढाबों में बर्तन घिसने को।
चाय की ठेलो पे,
कप धोने को ।

अब बस बहुत हुआ,
अपनी सोच बदलनी होगी ।
केवल कानून कुछ कर न पाएगा,
कसम हमें खानी होगी ।
घरों में बच्चों से,
काम न करवाने कि।
हाथो में उनके ,
कलम किताब थमाने कि।

देश मेरा बदलेगा ,
विश्वास है मुझे,
हर कोई साक्षर होगा,
आस है मुझे।

‘अनु महेश्वरी ‘
चेन्नई

10 Comments

  1. mani mani 29/08/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 29/08/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/08/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/08/2016
  4. Kajalsoni 29/08/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/08/2016

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