प्रार्थना

prarthana-1
(इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ)

समय अंतराल पर भिन्न सोच के रूप ।
पाहन से बात करते झुके मानव स्वरुप ।
झुके मानव स्वरुप कहें दया करो दानी ।
एक कथा को गए अनगिनत बनी कहानी ।
कहैं विजय कविराय हौसलों की हो जय जय ।
सवाल जवाब न दें जब तक आये ना समय ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

11 Comments

  1. babucm babucm 22/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 23/08/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 24/08/2016

Leave a Reply