कविजन भाग-2

Kavijan-2-1
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महारथी हैं सर्वजीत विषय अकेला होय ।
एक विषय अनेक भाव लिखना मुश्किल होय ।

देखन में नेता लगै बन बैठे कविराज ।
चुन चुन कर कविता लिखें सुरेंद्र महाराज ।

अरुण उदय जब होत है जग भी जग ही जाय ।
कलम चले फिर धार से सबके मन को भाय ।

शीतलेश भी आय हैं थाम व्यंग हथियार ।
मन में ऐसे भाव हैं हो कविजन को प्यार ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

14 Comments

  1. babucm babucm 22/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 23/08/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 24/08/2016
  5. mani mani 24/08/2016
  6. SARJANSHETA 27/08/2016

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