सांसो का व्यापार प्रिये हो जाता

सांसो का व्यापार प्रिये हो जाता, पूरा इस बार प्रिये।
ऊँचा उड़ने की ख्वाईश में पंख झुलसा गए है मेरे यार प्रिये।।
दुनियादारी निभाने में झुक गयी है कमर अब जिंदगी की कम हो गयी है रफ़्तार प्रिये।।
चेहरे के नकाब रंगीन है दुनिया के लोंगो के कोई बेनकाब मिलेगा,कब तक करू उसका इंतज़ार प्रिये।।
देखो ना सफर कितना हसीं था ख्वाबों का हकीकत की दुनिया में नहीं मिलता प्यार प्रिये।।
गम है रंज है शिकायतों का अम्बार है प्रिये भूल जाना सब कुछ, अजनबी की तरह मिलना उस पार प्रिये।।

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  1. C.M. Sharma babucm 22/08/2016

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