मोहब्बत कर बैठे – ग़ज़ल – सर्वजीत सिंह

मोहब्बत कर बैठे

मोहब्बत कर तो बैठे हम पर मोहब्बत करने में नादान थे
कभी मिलती है ख़ुशी तो कभी गम इस बात से अन्जान थे

मोहब्बत की थी हमने बड़ी शिद्दत से निभाये थे सारे रिश्ते
हमारी मोहब्बत देखके दुनिया वाले न जाने क्यूँ परेशान थे

चारों और थी खुशियाँ मज़े से कट रहा था ज़िंदगी का सफर
फिर मोहब्बत में क्यूँ आ गई दरार इस बात से हम हैरान थे

दिलों में आ गई थी दूरियां रिश्तों में भी होने लगी थी घुटन
क्यूँ हो गई इक दूजे से रंजिश अपने ऐसे तो ना अरमान थे

खत्म कर के सब गिले शिकवे फिर करीब आ गए हैं सर्वजीत
हमारी मोहब्बत में कोई कमी नहीं थी हालात ही बेईमान थे

सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

25 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  3. लालजी सिंह यादव 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  6. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 26/10/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 27/10/2016
  9. mani mani 27/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 27/10/2016
  10. Kajalsoni 27/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 28/10/2016
  11. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 28/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 28/10/2016
  12. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 28/10/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 28/10/2016
  13. Saviakna Savita Verma 31/10/2016

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