“पिताः (मजदूर)”-शीतलेश थुल

sheetpitaah
लो चढ़ गया सूरज सिर पे,
एक और दिन निकल गया,
परिवार का पेट पालने , पानी पी के ही घर से निकल गया,
जल रहे है पाँव जमीं पे, फिर भी चलते जाना है,
छोटू के लिये गुड्डा और चुटकी का फ्राक जो लेते आना है,
प्यार की गठरी में बांधकर उसने, रोटी साग भिजवाया है,
खाली कांच की शीशी देकर, अम्मा ने दवा मंगवाया है,
बाबूजी के एनक का डंडा ठीक करवाना है,
उसके उलझते बालो को एक गजरा भी तो दिलवाना है,
आज दूर गाँव से मेरे दूर के चाचाजी भी आयेंगे,
चाहे लाख मना लो जितना, बिना अचार खाना नही खायेंगे,
इस भागम भाग में पूरा दिन निकल गया,
लो चढ़ गया सूरज सिर पे,
एक और दिन निकल गया
शीतलेश थुल !!

14 Comments

  1. babucm C.m sharma(babbu) 21/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
  2. shrija kumari shrija kumari 21/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
  3. mani mani 21/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 22/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 30/08/2016

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