उड़ान…..

सोचती हूं कभी – कभी
काश ….मैं पंछी होती
मेरे भी पंख होते ….
बेफिक्र , जब मन कहता
लगती आसमान में उड़ने ….
ऊँची…. होती उड़ान ,
मेरे ख़्वाब भी उड़ते
मेरी चहचहाती बोली ,
उड़ते बादल भी सुनते
हर जगह से होती रूबरू …..
सारा जहां मेरा होता ,
ना कोई बंदिश होती ,
ना कोई डर होता
जहाँ चाह होती , वहां मेरा एक बसेरा होता …..
सुकून भरी चांदनी होती और ,
सूरज की किरणों से ही मेरा सवेरा होता ….
आँखों में गहरे समंदर और
प्रकृति का ख़ूबसूरत नज़ारा होता …
काश …..काश ….
मेरे पास भी पंछियों सी उड़ान का
एक पंख होता ……..

4 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 21/08/2016
  2. babucm C.m sharma(babbu) 21/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/08/2016

Leave a Reply