मानव का कर्म

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सोच-समझ विचार कर देखो, क्या मानव का कर्म है ।
आतंकी कुरूपता को त्यागो, यह तो महा अधर्म है ।
मानव मन में ईश्वर है, जिसका प्रतीक है प्रेम विमल,
सबके हित की रक्षा करना, ही मानव का धर्म है ।
अभिषेक शर्मा अभि
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मुक्तक

6 Comments

  1. mani mani 21/08/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 21/08/2016
  3. babucm C.m sharma(babbu) 21/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 21/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/08/2016

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