” आज ख्वाबों में अचानक निर्भया की चीख बोली”

आज ख्वाबों में अचानक निर्भया की चीख बोली
सिर्फ़ वो ही तो नहीँ कुछ जिंदगी की सीख बोली

अवतरण से ही तो हमने भेद के व्यवहार झेले
आस थी उल्लास की लेकिन लगे थे ग़म के मेले
खो गया जाने कहाँ था मेरे ख्वाबों का बसेरा
पक्षपाती जब बना जग में स्वयं मेरा चितेरा
किंतु रहकर मौन मै तो हर सितम सहती गयी हूँ
मैं थी इक धारा जिधर मोड़ा उधर बहती गयी हूँ
चित्र है खुशियों का धुँधला और फीकी है रंगोली
आज ख्वाबों में अचानक———————-

उम्र की दहलीज पर जबसे हमारे पग पधारे
राह में बैठे मिले हैं ब्याल अपने फन पसारे
वासना के भेडियों का झुंड तो पग-पग मिला है
आँख में लालच हवस का, मुँह में लोहू दिखा है
वो दुशासन बनके मेरा चीर हरते ही रहे पर
ना मिला है भीम कोई ना मिला है नंद-नटवर
खेलते ही सब रहे मेरे सजल शोणित से होली
आज ख्वाबों में अचानक ———————

मैं ही तो आधार हूँ इस जग के उपजे गुलशनो का
शूल को भी तो मिला आसन मेरे आलिंगनो का
सींचकर अपने लहू से मैने सूखे वन सुधारे
त्याग की पहचान बनकर मैने सब सुख चैन वारे
बिन हमारे काल की भी जाम हो जाएँगी घड़ियाँ
फ़िर भी क्यों डाली हैं तुमने इन पगों में लौह कड़ियां ?
और पायी है हमेशा ही तिरस्कारो की बोली
आज ख्वाबों में अचानक ———————–

पर नहीँ अब नर ये सोचे, बिन तेरे कुछ भी नहीँ मैं
खोलकर आँखों को देखो स्वर्ण-इतिहासो जड़ी मैं
व्योम, भू देखो समंदर या कोई चट्टान देखो
शीर्ष शिखरों पर सुशोभित तुम मेरी ही शान देखो
तुम जिन्हें थे धूप समझे वो महज़ निकले अमावस
जब निराशाओं के घन थे नैन में ऋतुए थीं पावस
तब लगाई सिंधु, साक्षी ने शिखर-भारत पे रोली
आज ख्वाबों में अचानक ———————-

———कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 21/08/2016
  2. mani mani 21/08/2016

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