“अजीब लोग”-शीतलेश थुल

अजीब लोग
“अजीब लोग”
कांच के महलों में रहते, मेरे घर पत्थर मारते है लोग,
ना जाने क्यू ऐसा करते है लोग,
उठता धुआं परेशान करता उन्हें,
मेरे घर के चूल्हे की आग बुझा कर, दम भरने लगते है लोग,
ना जाने क्यू ऐसा करते है लोग,
कचरा पेटी देख कूड़ा से निशाना लगाते,
चूक जाये निशाना जो, मेरे घर सामने कचरा फैलाते है लोग,
ना जाने क्यू ऐसा करते है लोग,
बाएं हाँथ मैं चलता हरदम, धक्का मारते है लोग,
अँधा काना संज्ञा देते, गाली देते है कुछ लोग,
ना जाने क्यू ऐसा करते है लोग, ये अजीब लोग II
शीतलेश थुल !!

14 Comments

    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  2. mani mani 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 20/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  5. C.M. Sharma babucm 20/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  6. Er Anand Sagar Pandey 20/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016

Leave a Reply