मैं और रेहड़ा………….मनिंदर सिंह “मनी”

मैं रेहड़े को खीचता,
रेहड़ा मेरा घर सींचता,
ढोह कर भार दिन भर,
बड़ी मुश्किल से,
चार पैसे कमा पाता,
मेहनत और पसीने की,
आती खुशबू मेरे सीने से,
पेट भर अपने परिवार का,
सकून से सो पाता,
तुम लोगो की नज़रो में,
मैं एक गरीब रेहड़े वाला,
बजाकर हॉर्न देते मुझे गाली हो,
ना देखते उम्र, ना देखते मजबूरी,
बस अपनी ही कहते हो,
जल्दी को भी वक्त चाहिए,
पर तुम समझते नहीं,
सुन्दर से लिबासो में,
जाने क्यों बने मवाली हो,
किसका दिल करता है,
हर रोज जान हथेली पर लेकर,
भरे जाम से निकला जाये,
किसी को लगे ना, कोई गाली दे ना,
या रेहड़ा पलटे ना, कही भरी दोपहरी में,
कभी सर्द रात में, हिम्मत टूट ना जाये,
मैं और रेहड़ा हर रोज,
घर से निकलते है,
ले बोझ धीरे धीरे,
राहों पर चलते है,
बस कुछ मजबूरी,
कुछ कुदरत का लिखा,
हम भी किसी के बेटे,
किसी के पिता,
किसी के सुहाग है,
जो पलके बिछाये,
हमारा इंतज़ार करते है,
ऐ “मनी” निकाल लिया करो,
दो पल हमारे लिए भी,
बदन तोड़ मशक्त कर,
सारा दिन मैं और रेहड़ा,
सड़क पर चलते है,,

16 Comments

  1. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 19/08/2016
    • mani mani 19/08/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
    • mani mani 19/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 19/08/2016
    • mani mani 19/08/2016
      • C.M. Sharma babucm 19/08/2016
  4. mani mani 19/08/2016
    • mani mani 19/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
    • mani mani 19/08/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 19/08/2016
    • mani mani 20/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • mani mani 20/08/2016

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