“काल”-शीतलेश थुल

काल
“काल”
घनघोर अँधेरा छा रहा है, कोई दूर होता जा रहा है,
काल के वाहन पे बैंठ, वो मुझको लेने आ रहा है,
कंठ सूखता, ह्रदय रूकता, हाँथ पैर भी ठन्डे पड़ गये,
रक्त जमता जा रहा है,
काल चबैने को चबा, वो मुझ ओर ही बढ़ता आ रहा है।
धडकने होने लगी है बैचेन, तू साँसें क्यू नहीं ले पा रहा है,
हाँथ पैर की हरकते सुन्न, आस-पड़ोस का ताता बढ़ता जा रहा है,
कौन है वो काल, किस पे है वो सवार, जो मुझे डराने आ रहा है,
हर चला मेरे वो प्राण, पड़ा रहा शरीर बेजान,
उठ गयी देखो मेरी अर्थी, साथ चल दिए सभी सारथी,
वातावरण में गूंज रहा एक ही शब्द है,
“राम नाम सत्य है”, “राम नाम सत्य है”
शीतलेश थुल !!

14 Comments

    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
  2. babucm babucm 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
  3. mani mani 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 19/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/08/2016

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