फ़िर बहार दो – शिशिर मधुकर

एक बार जो हँस के तुम मुझको पुकार लो
बिगड़ी हुई सूरत मेरी एक पल में संवार दो
मिट रहे है जो गुलिस्ता बारिश की आस में
निज प्रेम को बरसा के उन्हे फ़िर बहार दो.

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016

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