मन की उलझन

कभी कभी जिंदगी से हार जाने का मन करता है
मौत के गले लगकर सुकून पाने का मन करता है
ख्वाहिशों की बेड़ियों से जो जिंदगी बंधी है
उन बेड़ियों को तोड़ आज़ादी पाने का मन करता है
जीने के लिए काम या काम के लिए जी रहे हैं
इन उल्झे सवालों का जवाब पाने का मन करता है
कभी कभी  लगता है बस बहुत हुआ
अब ईश्वर की गोद मे सोजाने का मन करता है
जिंदगी मिली है बहुत खूबसूरत रिश्ताें के साथ
मगर कभी सब छोड़ जाने से दिल डरता है
इक दिन सभी साथ छूट जाएंगे मेरे
जो कभी न छोड़ेगा साथ उसके पास जाने का मन करता है।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
    • aadita 19/08/2016
    • aadita 19/08/2016

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