यादों के नासूर – शिशिर मधुकर

तुमको आओ आज हम सब खुलकर बताते हैं
तुम्हारी यादों के नासूर हमको कितना सताते हैं

जिनको सुकून मिलता हो बने घरोंदो को गिराने में
वो क्या समझेंगे उन्हे जो शिद्दतो से घर बनाते हैं

कभी पा कर के तुझे जिंदगी आबाद थी अपनी
मुस्कराहट नहीँ अब लोग चाहे जितना हँसाते हैं

सफर बेहतर हो अपनों संग कहना नहीँ मुमकिन
बीच मझधार में कई बार वो ही तुमको डुबाते हैं

मुश्किल भरी डगर तो अब पीछे छूटी हैं मधुकर
यादों के शूल पर आज भी इस मन को दुखाते हैं

शिशिर मधुकर

15 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 18/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
  3. mani mani 18/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 18/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
      • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/08/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 18/08/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016
  8. Er Anand Sagar Pandey 19/08/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/08/2016

Leave a Reply