उनके नैनॊं का सजल नीर ही भागीरथ की गंगा है

जिनको हर धर्मों के ध्वज से प्यारा ये अनघ तिरंगा है,
जो आजादी की शम्मा में इक जलता हुआ पतंगा है,
जिसने अपने कुल का दीपक कर दिया दान माँ भारत को,
उनके नैनॊं का सजल नीर ही भागीरथ की गंगा है

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

Leave a Reply