शत बार नमन उन वीरों को

जिनकी दम पर हम अपने घर नींद चैन की सोते हैं
आओ मिलकर हम उनकी यादों में आँख भिगोते हैं
शत बार नमन उन वीरों को अपना बलिदान दे गये जो
हाँ पर धिक्कार उन्हें हैं जो विषबीज रोज़ ही बोते हैं

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

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  1. C.M. Sharma babucm 18/08/2016

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