अब कौन

ये आज समय की बात है
हरकोई अब सरताज है
हक़दार हक़ को रोता है
अन्नदाता भूखा सोता है

मर जाता है बीच सड़क पर
प्रशासन अजगर सा सोता है
हो रही मिलावट जीभरकर
दूध खोवा सब खोटा है

चलता काफिलों में अनपढ़ होकर
कोई पढ़ लिखकर मैला ढोता है
फेकता कोई भोजन सड़क पर
कोई भूखा रातों में सोता है

मर रहा बूँद बूँद पानी को कोई
मीलों चलकर मटके ढोता है
चमकाता मोटर कार को कोई
स्विमिंग पूल में लूंगी धोता है

करता नहीं सम्मान औरत का
सिरफिरा छेड़खानी करता है
हो अन्धा चलाता दोपहिया
आवारा परेशानी करता है

हो गए खरीददार बहुत
अब कौन सब्र से टिकता है
दोस्ती, भरोसा, रूह, यौवन
मेरे दोस्त यहां सब बिकता है

7 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 17/08/2016
  2. mani mani 17/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/08/2016
  4. Kajalsoni 17/08/2016
  5. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 17/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/08/2016

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