हिन्द का सिपाही

कौन कहता है ज़माने में वफादारी नहीं
हिम्मत है अगर मुझ में तोह कोई गदारी नहीं
कैसी भी राह बनायीं गयी हो मेरे लिए …….
मैं हूँ सिपाही , मेरी दर्द से कोई भागीदारी नहीं

खड़ा हूँ बीच मैं तेरे , मेरे देश के ओ दुश्मन
खड़ा हूँ राह मैं तेरी , जो मेरे देश तक आई
मेरे सीने को मैंने किया है पत्थर की तरह
हिलेगा नहीं फ़र्ज़ से कभी जो कोई गोली तेरी आई

मैं रक्षक की तरह हूँ इस हिन्द का सिपाही हूँ
अगर हिम्मत है तो कर के दिखाए कोई फनाह मुझको
मेरी जो रोटी है वो मेरे देश की अमानत है ………
हो जायेगा भस्म जिसने भी आंखे देश को दिखाई है

मेरी शद्दत से ही रोशन है मेरे देश की गालिया
ये फूलो भरी क्यारी और जगमगाती सी हुई लाडिया
मुझको मेरा भारत अपनी जान से भी प्यारा है …
तू बस रुक जा ज़रा अभी तेरा वक़्त प्यारा है ….

इन् गोलियों से मुझे क्या कोई हराएगा …
में हूँ हिन्द की सेना मुझे क्या कोई भगाएगा
मैं फौजी हूँ ज़माने मैं मेरा रुतबा ही ऐसा है
मैं खड़ा हूँ जहाँ वहां तक कोई दुश्मन न आएगा …….जय हिन्द

9 Comments

  1. mani mani 17/08/2016
  2. babucm babucm 17/08/2016
  3. vijaykr811 विजय कुमार 17/08/2016
  4. Kajalsoni 17/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/08/2016
  6. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 20/08/2016
    • tamanna tamanna 20/08/2016

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