प्रार्थना(ग़ज़ल)-रामबली गुप्ता

वह्र=221 1221 1221 122

हे! ईश! हे’ जगदीश! दया मान व बल दो।
हो शीश पे’ आशीष हमें ज्ञान-विमल दो।

कर दूर सभी द्वेष मलिन-भाव हृदय से।
प्रभु! काट तमस-बंध हृदय-ज्योति धवल दो।।

सुर-साज नया ताल नया राग नया रव।
प्रभु! छंद-नया गान-मृदुल कंठ-नवल दो।।

प्रभु! ध्यान रहो नित्य व अधरों पे’ हमारे।
निज भक्ति-भरे भाव के’ नव गीत-ग़ज़ल दो।।

हिय-बाग में’ नित पुष्प खिलें रंग-बिरंगे।
प्रभु! उर के’ सरोवर में’ नया नेह-कमल दो।।

दारिद्र सभी दुःख-कलुष-भेद मिटा प्रभु!
सुख-शांति सुखद ठाँव व आनंद के’ पल दो।।

मद आँधियों’ का तोड़ सभी विघ्न मिटाएं।
तन-मन में’ सहन-शक्ति प्रभो! धैर्य-अटल दो।।

प्रभु! राष्ट्र के’ रक्षार्थ न पग पीछे’ रखें हम।
भय ताप से’ अरि पाएं’ हृदय मे वो’ अनल दो।।

रचना-रामबली गुप्ता

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/08/2016
  3. babucm babucm 17/08/2016
  4. mani mani 17/08/2016
  5. Kajalsoni 17/08/2016

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