एक तरफ़ा मोहब्बत ‘

”एक तरफ़ा मोहब्बत ”
झुकी हुयी नजरो से वो इशारों ही इशारो मे इझहारे मोहब्बत कर गयी।. कातीलाना नजरो से धडकनो मे दिल की मेरे ईज़ाफा गज़ब का कर गयी। कम न हुआ था तडपना अभी मुडकर नजरो से फिर एक वार कर गयी।. कुर्बां होने को तय्यार बैठे थे हम जालीम सरे मेहफिल तडपता छोड गयी।.
इन्तेजार मे तडपे इस कद्र के इम्तेहान की हद हो गयी ।. अर्जीयॉ मिन्नते दुआओं मे कोई कसर बाकी न रह गयी । इन्तेजार अभी खत्म न हुआ जवानी उन्हे ढुंढने मे कट गयी।.
आयी जब खबर उनकी आँखे भरी की भरी रह गयी i
हरकतो को नाबीना की मोहब्बत समझ बैठा बडी भुल हो गयी।.
(आशफाक खोपेकर)

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
  3. babucm babucm 16/08/2016
  4. नवल पाल प्रभाकर NAVAL PAL PARBHAKAR 16/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/08/2016
  6. Kajalsoni 16/08/2016

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