काव्यांजलि

मिटटी की पहली पुकार, पर बरसा का अभिनन्दन है
इंद्रधनुष के सप्तरंग से , बर्षा का शतबंदन है
मिटटी की पहली पुकार, पर बरसा का अभिनन्दन है …….
तरु – पल्लव जो था मुरझाया , मानो मधुर – मधुर मुस्काया
जलती धरती की काया से , मेघों का आलिंगन है
मिटटी की पहली पुकार, पर बरसा का अभिनन्दन है …………
बर्षा की मधुरिम बेला पर, दिल में उमंग जग जाती है
आज प्रकृति आनंदित होकर , अपनी छटा बिखरती है
सौंधी खुशबू की सुगंध से , माटी मानो चन्दन है
मिटटी की पहली पुकार, पर बरसा का अभिनन्दन है…………
रिमझिम – रिमझिम बरसे पानी , नभ में है पंछी गान करे
फर – फर करके उड़े पतंगे , धरती पर पपिहा पान करे
टर्र – टर्र मेढक के बोले , धरती में स्पंदन है
मिटटी की पहली पुकार, पर बरसा का अभिनन्दन है

Thank’s ,
“KRISHNA”

12 Comments

  1. babucm C.m sharma(babbu) 15/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/08/2016
  4. Kajalsoni 16/08/2016
    • Krishna Chaturvedi Krishna Chaturvedi 18/08/2016
    • Krishna Chaturvedi Krishna Chaturvedi 20/08/2016
  5. आलोक पान्डेय ALOK PANDEY 03/09/2016

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