एक – दूजे से तार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

चाँद भी हो जाये काला
जो सूरज से न हो उजियाला

जड़े भी वे है सूखी
धरती से जो ऊपर उठी

पानी भी है वो मटमैला
जो कंकड़ – पत्थर संग न खेला

सागर भी तब होगा खाली
पानी को जब देगा गाली

जुड़े हुए है तार सभी के
एक दूजे से
रूठ गया जो आसमा तो
ज़मी भी हिल जाएगी
धीरे -2 स्वयं में
मिट्टी -2 हो जाएगी

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  1. mani mani 15/08/2016

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