जय हिन्द

गाँधी टोपी पहिन के टोपी दें पहिनाय ।
पांच बरस का वोट लें एक दिन नजर न आय ।

लूट का राज बन गया राजनीति दूषाय ।
प्रजा राज के नाम पर वंश को सींचा जाय ।

धरम धरम में भेद कर जाति जाति लड़ाय ।
अपने-अपने मत को नफ़रत दें फैलाय ।

आपदा की चिंता नहीं लाभ देख सहयोग ।
मदद की राशि बँट रही बिचौलियों का भोग ।

जो न हो किसी काम का वह नेता बन जाय ।
राज मिले जब हाथ में जन पे रोब जमाय ।

विकास को नहीं धन जुटे मन का वेतन पाय ।
अपना हाथ जगन्नाथ रोक टोक ना भाय ।

व्यवस्था अति क्षीण भई धन धन को ही जाय ।
लाखों-जन की जिंदगी एक हाथ में आय ।

जय हिन्द-जय मजबूरी जय अमीर की होय ।
जय हिन्द-जय लाचारी जय नेता की होय ।

जय हिन्द-जय दुराचार जय पुलिसन की होय ।
जय हिन्द जय भ्रष्टाचार जय शासन की होय ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

14 Comments

  1. Er Anand Sagar Pandey 15/08/2016
  2. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 15/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  4. mani mani 15/08/2016
  5. babucm C.m sharma(babbu) 15/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/08/2016

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