**जकड़ी है::आनंद सागर **

****जकड़ी है****

कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है,
ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l

हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है,
और यही पैसे वालों की जागीरों में जकड़ी है l

मां-बहनों पर दिन ढलते ही खौफ़ का साया रहता है,
और हवस के भूखों की ये तासीरों में जकड़ी है l

भ्रष्टाचार का दानव इसको बरसों-बरस सताता है,
ये संसद की उल्टी-सीधी तदबीरों में जकड़ी है l

मजहब के साये में दंगे रोज पनपते जाते हैं,
ये जन्नत की ख्वाहिश वाले ताबीरों में जकड़ी है l

कलमगार की बिकी कलम ने वक्त से नाता तोड़ लिया,
ये गद्दारों के हाथों अब गालिब-मीरों में जकड़ी है ll

Word-meanings-

मुफलिस=गरीब
तासीर=चरित्र
तदबीर=सलाह/राय
ताबीर=सपनों की हक़ीक़त

All rights reserved.

-Er Anand Sagar Pandey

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  2. mani mani 15/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016

Leave a Reply