तिरंगा फहराएँ खूब

ताटंक छंद
( 16-14 मात्रा बंदिश के साथ)

फिर आया है दिन उमंग का,
जश्न आज मनाएँ खूब!
नाचे गायें मन हो जितना,
तिरंगा फहराए खूब!!

लिए जन्म बुद्ध नानक जहाँ
वह सरजमी हमारी है!
जियें और जीनें दे सबको,
सनातन नीति प्यारी है!!

प्यार शांति और अहिंसा का,
जग में सन्देश सिखाये खूब!
नाचे गायें मन हो जितना,
तिरंगा फहराएँ खूब!!

करे प्रतिज्ञा भारतवासी,
फेके न हम लम्बे चौड़े!
हो रण बीच शेर गर्जना,
लेकर अरि का धड़ दौड़े!!

दामन आँच न आने देंगे,
जग को बतलाये खूब!
नाचे गायें मन हो जितना,
तिरंगा फहराएँ खूब!!

देश की आन अजर अमर है,
वीरों की कुर्बानी से।
सोना उगले धरती अपनी,
मेहनत कस किसानी से।।

भारत है सोने की चिड़िया
विश्व मुकुट बनाये खूब।
नाचे गाये मन हो जितना,
तिरंगा फहराए खूब।।
!!!!
!!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

12 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 15/08/2016
  2. mani mani 15/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 15/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 15/08/2016
  6. Er Anand Sagar Pandey 15/08/2016
  7. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 15/08/2016
  8. Saviakna Savita Verma 15/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
  9. babucm C.m sharma(babbu) 15/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016

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