सूखा पेड़ – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

images (2)

दूर खेत किनारे
एक सूखा पेड़ खड़ा
बंजर भूमि जैसा ही
बंजर वो पेड़ पड़ा

जिसकी छाव में बच्चे
खेलते थे कभी
टहनियों में उसकी
झूलते थे कभी

जो बचाता सूरज की
तपीस से हमें कभी
देता हर पल मृदु छाया
बनता कभी पंछीयों का घर

आज वो खुद तरस रहा
कोमल छाव के लिए
जर्जर हुई टहनियां अब
टूट रही कर्कश ध्वनि लिए

अब कौन इसे सजाएगा ?
एक नई आस लिए
इस सूखे पेड़ को
जगाएगा ।

One Response

  1. happy 17/08/2016