आजादी के मतवाले

हर जुबाँ पे जय हिंद था आजादी का जुनून था
जिधर तरफ नजर पड़ी शहीद का ही खून था
हर सर पर कफन था हर गली मे खूब दंगा था
जिधर तरफ भी हाथ उठे हर हाथ मे तिरंगा था
जुबाँ पे बन्देमातरम लिये हर दिल मे इंकलाब था
जिस शहर नजर गयी वहीं इंतकाम का सैलाब था
उजड़ रहे थे कई सुहाग अंग्रेजों की गोली से
जल उठा हर शहर विदेशी कपड़ों की होली से
शहीद जो जवां हुआ माँ भारती का ही बेटा था
हौसलों के सामने कद हिमालय का भी छोटा था
हर जवां के लिये आयी थी बलिदानों की घड़ी
हौसलों के सामने पिघल गयी जेल की हथकड़ी
भड़क गयी थी हर चिंगारी आजादी की मशाल से
तंग आ गये थे हिन्दुस्तानी गोरों की हर चाल से
कर रहे थे तिलक अपनी भारत की माटी से
भाग रहे थे सारे गोरे भारतीयों की लाठी से
आंदोलन कर रहे थे सारे बच्चे बूढ़े हों या नर नारी
अंग्रेजों को खदेड़ने के लिये जनता उमड़ पड़ी सारी
अंत समय मे शहीदों का बलिदान रंग ला ही गया
जिसका इंतजार था वो आजादी का दिन भी आ गया
नमन् करें उन वीरों को जिन्होने आजादी का भारत दिया
तिलक करें उस माटी का जिसने ऐसे वीरों को पैदा किया
जब-जब भारत भूमी पर अत्याचार होते जायेंगे
तब-तब देश के सारे लोग एकजुट होते जायेंगे
( अनूप मिश्रा )

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/08/2016
  2. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 14/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016

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