पेड़ के पत्ते – बी पी शर्मा बिन्दु

पत्ता गिरा
धीरे से खिसका
और सोचा
फिर घबराया
थोड़ी देर बाद
नम हो गई आॅखें।

रिस्ता-नाता
टूटकर अलग हो गई जिन्दगी
तद्उपरांत
शिसकता रहा पेड़
सोचता रहा निरंतर
निरूत्तर।

कभी वो अपना था
और आज
थोड़ी देर पहले
हवा में
इधर.उधर
न जानें
कहाॅ-कहाॅ उड़ जायेेगा।

किधर-किधर भटकेगा
देखता रहा शून्य में
उठाकर ले जायेगा कोई
इंधन बना लेगा
जला देगा चूल्हे में।
या यॅूही
टूट-टुटकर
मिट्टी में मिल जायेगा।

मेरे गर्भ से जन्मा
बड़ी प्यार से
झूले झूला
गोद में पला
आंधी तुफानों से लड़ा
आज
मेरे रहते
उर्म पूरी हो गई उसकी।

वाह रे जिन्दगी
उपर वाले का खेल
अद्भुत लिला
माॅ की आॅचल सेे
कैसे तूनें
छीन लिया हमसे।

मेरा मुन्ना
मेरा प्यारा सा लाल
प्राण से प्यारा
बिलकुल ही
अबोध
हाय रे पत्ता
हाय रे पत्ते की जिन्दगी।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

10 Comments

  1. mani mani 14/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 14/08/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016

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