रहता है वहां एक

बहुत थोड़ा है मेरा सामान देखिए
जेबों में पड़े अरमान देखिए
कूबत न हो बेशक इबादत की
टूटता नहीं मेरा ईमान देखिए

दिल को दुखाकर मुस्काता मैं नहीं
दुखों में खिलती मेरी मुस्कान देखिए
पुकारते बेशक कुछ वक़्त के लिए मुझे
चाहतों से बनते मेरे निशान देखिए

फूलों सा रखता हूँ संभालकर दिल को
चाहत भरा मेरा बागवान देखिए
रास नहीं आती उदासी औरों की मुझे
झूठा हशाती मेरी जुबान देखिए

उस तंग गली के नुक्कड़ बना है
एक तंगी भरा मेरा मकान देखिए
दुआएं जो करता औरों की सलामती की
राकेश रहता है वहां एक इन्शान देखिए

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016

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