मुर्दे की ज़िन्दगी

आज पता चल रहा है मौत कितनी मुश्किल है।
मे मौत चाहता हू, उस हसीन लमहे को अब गले लगाना चाहता हू।
इस बदनाम बदन पर कफन तो चढा दिया मगर इस दिल मे अब भी जान बाकी है। क्यू बाकी है ये जान?
बेआबरु होगये इस दुनिया मे हम, जब खुलेआम हमारे प्यार की इज्जत लुटी गयी
हम देखते रहे,
कर भी क्या सकते थे,
क्युंकी लुटनेवाला हमारा प्यार ही था।
बस अब नही जीना चाहते हम इस दुनिया मे
जहाँ सपने दिखाकर जिंदगी छीनी जाती है।
मेने उसपे अंधे की तरह प्यार किया, और वो मेरे अंधेपन का फायदा लेती रही।
बोहत घमंड था मुझे, मेरे इश्क पर
दखो ये मेरा प्यार है, कभी ना जुदा होगा ऐसा मेरा यार है,
मगर आज की रात लहु निकालने वाली थी,
उसने मुझे सांसे बताकर मेरी सांस ही छीनली।
जब मे निकला था घर से मंजिल की तलाश मे तब सिनेसे लिपटकर रोने वाली वो थी,
कह रही थी तेरे बीना मे नही रह सकती,
जब फिर आया था मे घर… तब अंदेखा करनेवाली भी वो थी।
तुम हमारी जान हो ये केहने वाली आज हमारी जान लेगयी।
थक चुका हुँ अब अकेले लढके, प्यार को पाने के लिए दिन रात ये नैना हे तरसे, कैसे जित होगी मेरे प्यार की जहाँ मेरे खिलाफ लढनेवाला मेरा हि प्यार है।
मेरी मौत के बाद कोई मुझको कायर कहेगा कोई निक्कमा कहेगा, जिस जिंदगी मे मेरे प्यार को इन्साफ नही मिलता, उस जिंदगी में अगर जिंदा रहे तो सारी उमर हलाल होके जिना होगा।
जहा मेरा बचपन गुजरा, जहाँ मेरी जवानीने जनम लीया, वो गलीया आज सुनं क्यु है?
आज उस गली में बोहत भीड क्यु हैं, किसीकोे बडे प्यारसे सजाया जा रहा था,पास जाके देखा तो एक शक्स बडे आरामसे कफन मे लेटा था। मेने लोगोसे पुछाँ कौन है ये लेटा हुआ शक्स, लोगोने बताया सरफीरा आशिक था खुदा को फना हुआ।वो लेटा हुआ शक्स मेरी तरफ देखकर बोला, ये जिंदगी बस एक छलावा है, कभी ना खतम होनेवाला गम का दरिया हैं, उस गम को मिटाने के लिए खुशी का जरीया है। हम खफा थे इन्सान खुदकी खुशी के लिए दुसरे की जान भी ले सकता है। जिंदगी के आखरी मोड पर समझ आया हम तो बस एक जरूरत थे, जब जरूरी था तो आजमाया, जरूरते ज्यादा बढ गयी तब मौत के बाजार में छोड दिया।

wrriten BY RAAG

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • RAAG 13/08/2016

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