“मेरी दोस्त”–शीतलेश थुल

मेरी दोस्त
छट गये गम के काले बादल ,
देखो शाम सुहानी आयी।
रोज रोज मैं सोचूँ जिसको,
आज वो मुझसे मिलने को आयी।
खाली प्रतिबिम्ब सा दर्पण निहारु ,
बातें उसकी कुछ समझ ना आयी।
बस सुनते रहा उसकी बातों को ,
वो आवाज मेरे मन को भायी।
अलग ही अंदाज़ उसकी बातों के ,
फिर वो मन ही मन मुस्कायी।
सोचा बात बढ़ाऊ आगे ,
वो थोड़ा संकुचायीं।
क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी ,
मैंने इच्छा जतायी।
“फूलें कास सकल महि छायी ,
वो हरषि-उर-लायी।“
हाँथ मिलाकर दोस्त कहा जब ,
“शीतलेश ” तेरी जिंदगी बदल गयी भाई।
शीतलेश थुल !!

10 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 13/08/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016

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