“क्या कहूँ”–शीतलेश थुल

क्या कहूँ
क्या कहूँ के अब ,
कहने सुनने को कुछ बाकी ना रहा।
तुमने जो पूछ लिया “आप कौन”
जान पहचान को कुछ बाकी ना रहा।
यादों की वो तस्वीर भी धुंधली ,
साफ़ करू पर (धूल ) छट ना रहा।
भूला किस्सा बातों को तेरी,
पर ज़हन से सब कुछ हट ना रहा।
हांथों की लकीरो से मेरे,
नाम तेरा अब मिट ना रहा।
क्या कहूँ के अब ,
कहने सुनने को कुछ बाकी ना रहा।
शीतलेश थुल !!

14 Comments

    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/08/2016
  1. mani mani 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016

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