“मेरी नन्ही परी-2”-शीतलेश थुल

बड़ा ही खूबसूरत था वो एहसास,
जब जिंदगी की हुई एक नयी शुरुआत ,
एक नन्ही सी परी , आयीं जब मेरे हाँथ।
मैं उसके पीछे घूम घूम , खाना रोज खिलाता था ,
आज वो दफ्तर जाने से पहले खाना मुझे खिलाती है।
मेरी साइकिल की सीट पे बैठ, वो मेला घुमा करती थी ,
आज वो अपनी कार से मुझको शॉपिंग मॉल घुमाती है।
मेरी ऊँगली पकड़ कर चलती, गिर के फिर संभलती थी।
आज मेरा सहारा बनकर मुझे संभाला करती है।
मेरी नन्ही परी अब बड़ी समझदार हो गयी है।
पुरे घर का ख्याल रखना सीख मेरा ख्याल भी रखती है।
शीतलेश थुल।

12 Comments

    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/08/2016
  1. mani mani 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 13/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 14/08/2016

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