सत्यमेव जयते – बी पी शर्मा बिन्दु

काश ये नजरें बदल जाती
सीख लेता प्यार
तीखी अवाज मिश्री जैसी
बन जाती मृदु।
स्वार्थ अपने आप से
दूर हो जाता
शेष रह जाता सत्य
केवल सत्य
कभी न मिटने वाला
बन जाता एक इतिहास।
राजा हरिश्चन्द्र.प्रहलाद
ऋषि दधिची.नचिकेता जैसा
बन जाता एक सबूत
सत्य से उत्पन शक्ति।
काश मिल जाती हमें
एक सबूत
बज्र की तरह
हीरे जैसा सक्त बना देने वाला
एक सार्थक सत्य
बन जाता सहारा
मेरा ही साथी
हमें दिला देता
एक विश्वास।
सौंदर्य और सुख
त्याग देता
पंक्षी की तरह
उनमुक्त वन में उड़ जाता
अमृत से युक्त हो जाता
सत्य हममें निहित हो जाती
जल और अग्नि की तरह
मैं भी पवित्र बन जाता।
उत्साह और आनंद से
जन्मा अमिट सत्य
सूरज और चाॅद के समान
धरती और अंबर।
प्राकृति वस्तुऐं
मैं भी और वह भी
सत्य जय विजय
सबसे बड़ी पुंजी
सत्यमेव जयते
वाणियों में अनमोल
सत्यमेव जयते।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 14/08/2016
  2. babucm babucm 13/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 14/08/2016
  3. mani mani 13/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 14/08/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 13/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 14/08/2016

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