दीदार-ए-बयां

बैठे हो, दिल में एक बात छुपाकर
पर बताते, कुछ भी नहीं
देखते हो, चोरी से पलकें उठाकर
पर दिखाते, कुछ भी नहीं
करते हो, गुफ्तगूं अकेले में तुम
पर कहते, कुछ भी नहीं
आती है हंसी, तुम्हारे होंठो पर भी
पर जताते, कुछ भी नहीं …..
13/08/2016

6 Comments

  1. babucm babucm 13/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 13/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 13/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 13/08/2016

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