‘मैं ढूंढता हूँ..’_अरुण कुमार तिवारी

मैं ढूंढता हूँ एक कतरा
आज़ादी के जश्न का।
मैं ढूंढता हूँ….

जन गण की आँखों में,
अर्थ चक्र के दांतों में|
झूठी श्रद्धा से जुड़े,
खून से सने हाथों में|

नित्य हो रहे दहन में,
‘विकास होगा’ के वहम में|
तार तार गरिमा करवाते,
विश्मित रुँधित सदन में|

अखबार की ख़बर में
वादों के असर में,
मौन मुद्रा के महात्मा को,
खादी के शहर में|

राष्ट्रगान के अपमान में,
देशद्रोह के सम्मान में|
बलात् लुटती आबरू के,
हो रहे उत्थान में…
हो रहे उत्थान में….

मैं ढूँढता हूँ एक कतरा,
आज़ादी के जश्न का |
मैं ढूंढता हूँ………
-‘अरुण’
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14 Comments

  1. sarvajit singh sarvajit singh 12/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 13/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 13/08/2016
  3. babucm babucm 13/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/08/2016
  4. mani mani 13/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/08/2016
  5. Saviakna Savita Verma 13/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/08/2016
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 13/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 17/08/2016

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