आराधना : उत्कर्ष

?? आराधना ??

दोहा•

प्रातः उठ वंदन करूँ,चरण नवाऊँ शीश ।
यशोगान तेरा करूँ, इतना दो आशीष ।।

सुन लो मेरी अरज भवानी ।
तेरी महिमा जग ने जानी ।।
दूर करो अज्ञान का साया ।
माता तेरीे दर पे आया ।।

दोहा•
करता में आराधना,माता सुनो पुकार ।
इस मूरख नादान का,कर दो बेडा पार ।।

करो कृपा माँ शेरोवाली ।
भर दो झोली मेरी खाली ।।
सच्चे मन से जो भी ध्यावे ।
संकट उसके पास न अावे ।।

विपति पड़ी तब आप उबारा ।
रूप सहस्त्र लिए अवतारा ।।
तुम ही गौरा आदि भवानी ।
तुम ही शारद जग कल्याणी ।।

जो भी तेरी शरण में आया ।
रिद्धि सिद्दी धन सम्पति पाया ।।
भटक रहा मैं सुनो भवानी ।
राह दिखाओ माता रानी ।।

दो•
सच के मारग पे चलूँ,छोड़ सभी जंजाल ।
तेरी सेवा में करूँ,चाहे जो हो हाल ।।

✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
+9184 4008-4006

एन के उत्कर्ष

एन के उत्कर्ष

8 Comments

  1. Saviakna Saviakna 12/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/08/2016
  3. babucm babucm 13/08/2016

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