मूक दर्शक………………..मनिंदर सिंह “मनी”

दुनिया को रौशन करने की चाहत लिए चल पड़ा मैं,
अंधेरो में रह रही दुनिया मशाल लिए अकेले खड़ा मैं,

हर बाशिन्दा मसरूफ खुद की जिंदगानी सवाँरने में,
हर कोई चाल चल रहा, अब दू तो किसको दू तडा मैं,

ख्वाहिशो की सारणी लिए लंबी कतारो में खड़े लोग,
हर रोज उन को बदलते देख रहा हु माँगो का थड़ा मैं,

ईष्या, क्रोध, दम्भ, मोह, वासना की लौ में फंसा हर कोई,
देख रहा हूँ घरानों को छोटा, मकानों को होते बड़ा मैं,

जिसने सुना वो हँसने लगा, कुछ ने अनसुना है कर दिया,
लगा ऐसे मनी जिन्दा लाशो के बीच मूक दर्शक सा खड़ा मैं,

तड़ा—-दोष,

14 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
  5. babucm babucm 12/08/2016
    • mani mani 12/08/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 12/08/2016
    • mani mani 13/08/2016

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