नजर तू जबसे – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

नजर तू जबसे, मुझे आने लगी,
जन्नत सा लगने लगा ये जहान,
पहले कभी न हुआ ये हाल ए दिल,
तेरे आने से हुआ है ये सब ।

मेरे हर दिन की, तू सुबह बन जा,
खोलू जब आँखे, तू इनमें बस जा,
तू जो हो सामने, मैं देखता रहूँ,
ये बात जो भी हो, इसे सोच न सकु ।

तेरे साथ जीने की, ख़्वाहिश मैं करता रहूँ,
तू बन जा मेरा ख़ुदा तेरा सजदा करता रहूँ,
गुमसुम सा हूँ तुझमे मैं, साथ ले चल मुझे,
वक्त की भीड़ मे, थाम ले तू मुझे ।

साया है तू मेरे दिन का, रात में भी हो जा संग,
कही तेरे बिन ये ज़िन्दगी, हो ना जाये बेरंग,
मेरे दिल मैं मेरी धडकन, मेरी धडकन में तू,
मेरी सांस में मेरी ज़िन्दगी, मेरी ज़िन्दगी है तू ।

4 Comments

  1. mani mani 12/08/2016
  2. gokul72525 gokul72525 12/08/2016
  3. Saviakna Savita Verma 13/08/2016
  4. gokul72525 gokul72525 13/08/2016

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