मेरी चाहत

मैं कब तेरी आंखे बनना चाहती हूँ
वो तो सबको देखा करती है …..

मैं तो तेरी धड़कन भी नहीं बनना चाहती
वो तो सबके लिए धड़का करती है ….

मैं तो बस तेरे कदमो की आहट बनना चाहती हूँ
जो हर पल मुझे तेरे आने का आभास कराती है
जो हर पल मुझे मेरे चहरे की हंसी का कारण लगती है
जो बिना कहे हर घडी ,तेरी हर बात मुझ से करती है

मुझे अपने दिल मे कर लो इस तरह शामिल
की मैं रहूँ तेरी सांसो मे घुली खुशबू की तरह
मुझे अपनी पलकों पे बिठा लो कुछ इस तरह..
की हर बार मैं छलकूं तेरी आँखों से नमी की तरह ……..

15 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
    • tamanna tamanna 12/08/2016
  2. gokul72525 gokul72525 12/08/2016
    • tamanna tamanna 12/08/2016
  3. mani mani 12/08/2016
    • tamanna tamanna 12/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
    • tamanna tamanna 12/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
    • tamanna tamanna 13/08/2016
  6. C.M. Sharma babucm 12/08/2016
    • tamanna tamanna 13/08/2016
  7. Saviakna Savita Verma 13/08/2016
    • tamanna tamanna 13/08/2016

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