“आतंकवाद”….शीतलेश थुल

आतंकवाद
आतंकवाद
तुमने मिलाया जो दुश्मनों से हाँथ , तो ये भी ना सोचा ,
चलानी पड़ेगी अपनों पे ही गोलिया , ये भी ना सोचा ,
माना की रखते हो जिगर तुम , अपनों को चोंट पहुचाने की ,
मगर जो पहले से टूट चुके है , उनके बारे में ना सोचा ,
मकसद बन चूका है तुम्हारा , अपनों को बर्बाद करना ,
आशियाँ जलाकर उनका, खुद को रोशन आबाद करना ,
पर जो जीते है अंधेरो में , उनके लिए ना सोचा ,
बातें करते हो तुम बस मरने मारने की , शहादत ज़िहाद के उसूलो की ,
ये रास्ता चुन अपनों को मार दिया , मगर दफनाने के बारे में ना सोचा .
धर्म के नाम पर अलगाववाद को बढ़ाया जो तुमने ,
जो बिछुड़े अलग है , उन्हें मिला दे – ना सोचा ,
लड़ पड़े हो तुम ज़न्नत और दो गज़ जमीं के लिये ,
अपने ही वतन का एक टुकड़ा ना मिला , क्या कभी ये भी ना सोचा।
जय हिन्द। जय भारत।
शीतलेश थुल !!

15 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  2. tamanna tamanna 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  3. mani mani 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 12/08/2016

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