ख़ामोशी ।

ख़ामोश रह कर, उसके हर इलज़ाम से, बरी हो गया मैं,
यार, कितनी कमीनी चीज़ होती है ना, ये ख़ामोशी भी ?

इलज़ाम = आरोप;
कमीना = बाज़ारू;
मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०७ अगस्त २०१६.

KHAMOSHI

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/08/2016
    • Markand Dave Markand Dave 13/08/2016

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