एक वाक्यां, जो अधूरा का अधूरा

एक बात पूँछु
क्या कहती हो
जिसे पूछने की आस
न जाने कितनी सदियों से
दबा कर बैठा हूँ
मन के भीतर
खली हो क्या ?
“आज नहीं कल”

एक बात पूँछु
क्या कहती हो
जिसे पूछने की कसक
न जाने मुझे, कित्ते सालो से
खाये जा रही है
दीमक की तरह
समय है क्या ?
“आज नहीं कल”

एक बात पूँछु
क्या कहती हो
मिलोगी क्या आज
वरना देर हो जाएगी
समय गुजरता सा जा रहा है
“कहाँ”?
जहाँ कहो वहाँ
समय तुम्हारा जगह तुम्हारी

“ओके, तीसरे पहर में,
चौपाटी पर”?

मैं उपस्थित रहूँगा “समय” पर
ख्याल रखना बस, वक्त का तुम

स……………म……………य
नहीं आयी “तुम”
आज तक इंतज़ार में बैठा
उसी चौपाटी पर
समय देखता हूँ बस …………….

8 Comments

  1. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016