ये नहीं मानते (अन्त्तिम कविता)…

ये,नहीं मानते…
वस्तु,को वस्तु…
प्रेम,को प्रेम…
इच्छा में शक्ति …
और खुद की अभिव्यक्ति को
सही ………………………

ये नहीं मानते…
विचारधारा को…
जीवनशैली को…
व्यस्तता को…
और खुद पर किये परिश्रम को
सही…………………………

अब मैं मनाता भी नहीं
जानता हूँ क्या चाहिए इन्हें अब

इन्हें चाहिए गुड
चाहिए इन्हें फ़ूड
इन्हें चाहिए मूड
चाहिए इन्हें झूठ

8 Comments

  1. babucm babucm 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
  3. mani mani 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/08/2016

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