“इस शहर में “

खुदा नहीं खुदा के बच्चे कम हैं
इस शहर में लोग अच्छे कम हैं ।

घर जाऊँ तो क्या लेकर जाऊँ
राशन महँगा खिलौने सस्ते कम हैं ।

अमन औ’प्यार की बातें हो जहाँ
उसी बस्ती में लोग बस्ते कम हैं ।

देखा है गुलदश्ते को रोते हुये
टूटे हुए फूल अक्सर हँसते कम हैं ।

कदम-कदम पे संभलकर चलना यारो
लुटेरी दुनिया में लोग सच्चे कम हैं ।

हौसला रक्खो मंजिल मिल ही जायेगी
क्या हुआ जो राह टेढ़ी रस्ते कम हैं ।।

खुदा नहीं खुदा के बच्चे कम हैं
इस शहर में लोग अच्छे कम हैं ।

-Padamshree

3 Comments

  1. babucm babucm 12/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/08/2016
  3. mani mani 12/08/2016

Leave a Reply